Thursday

परम मित्र (दोस्त) कौन है?

      *🍂परम मित्र कौन है?🍂*

   *एक व्यक्ति था उसके तीन मित्र थे।*

   *एक मित्र ऐसा था जो सदैव साथ देता था। एक पल, एक क्षण भी बिछुड़ता नहीं था।*

    *दूसरा मित्र ऐसा था जो सुबह शाम मिलता।*

    *और तीसरा मित्र ऐसा था जो बहुत दिनों में कभी कभी मिलता था।*

    *एक दिन कुछ ऐसा हुआ की उस व्यक्ति को अदालत में जाना था और किसी कार्यवश साथ में किसी को गवाह बनाकर साथ ले जाना था।*

   *अब वह व्यक्ति अपने सब से पहले अपने उस मित्र के पास गया जो सदैव उसका साथ देता था और बोला:-*

     *"मित्र क्या तुम मेरे साथ अदालत में गवाह बनकर चल सकते हो ?*

      *वह मित्र बोला :- माफ़ करो दोस्त, मुझे तो आज फुर्सत ही नहीं।*

    *उस व्यक्ति ने सोचा कि यह मित्र मेरा हमेशा साथ देता था। आज मुसीबत के समय पर इसने मुझे इंकार कर दिया।*

    *अब दूसरे मित्र की मुझे क्या आशा है?*

    *फिर भी हिम्मत रखकर दूसरे मित्र के पास गया जो सुबह शाम मिलता था, और अपनी समस्या सुनाई।*

   *दूसरे मित्र ने कहा कि :- मेरी एक शर्त है कि मैं सिर्फ अदालत के दरवाजे तक जाऊँगा, अन्दर तक नहीं।*

    *वह बोला कि :- बाहर के लिये तो मै ही बहुत हूँ मुझे तो अन्दर के लिये गवाह चाहिए।*

    *फिर वह थक हारकर अपने तीसरे मित्र के पास गया जो बहुत दिनों में मिलता था, और अपनी समस्या सुनाई।*

     *तीसरा मित्र उसकी समस्या सुनकर तुरन्त उसके साथ चल दिया।*

     *अब आप सोच रहे होंगे कि... वो तीन मित्र कौन है...?*

*तो चलिये, बताते है इस कथा का सार ।*
    
    *जैसे हमने तीन मित्रों की बात सुनी वैसे हर व्यक्ति के तीन मित्र होते हैं।*

    *सब से पहला मित्र है हमारा अपना 'शरीर' हम जहा भी जायेंगे, शरीर रुपी पहला मित्र हमारे साथ चलता है। एक पल, एक क्षण भी हमसे दूर नहीं होता।*

     *दूसरा मित्र है शरीर के 'सम्बन्धी' जैसे :- माता - पिता, भाई - बहन, मामा -चाचा इत्यादि जिनके साथ रहते हैं, जो सुबह - दोपहर शाम मिलते है।*

      *और  तीसरा मित्र है :- हमारे 'कर्म' जो सदा ही साथ जाते है।*

     *अब आप सोचिये कि आत्मा जब शरीर छोड़कर धर्मराज की अदालत में जाती है, उस समय शरीर रूपी पहला मित्र एक कदम भी आगे चलकर साथ नहीं देता। जैसे कि उस पहले मित्र ने साथ नहीं दिया।*

     *दूसरा मित्र - सम्बन्धी श्मशान घाट तक यानी अदालत के दरवाजे तक "राम नाम सत्य है" कहते हुए जाते हैं तथा वहाँ से फिर वापिस लौट जाते है।*

     *और  तीसरा मित्र, कर्म हैं। कर्म जो सदा ही साथ जाते है चाहे अच्छे हो या बुरे।*

     *अब अगर हमारे कर्म सदा हमारे साथ चलते है तो हमको अपने कर्म पर ध्यान देना होगा अगर हम अच्छे कर्म करेंगे तो किसी भी अदालत में जाने की जरुरत नहीं होगी।*

Tuesday

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स ऋषिकेश में एयर एंबुलेंस सेवा शुरू

मंगलवार को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स ऋषिकेश में एयर एंबुलेंस सेवा की ट्रॉयल लेंडिंग सफल रही। इसके साथ ही एम्स ऋषिकेश देश का पहला ऐसा सरकारी स्वास्थ्य संस्थान बन गया है जिसमें अपनी हेलीपेड की सुविधा उपलब्ध है। इससे राज्य के विभिन्न हिस्सों में आपदा के समय घायल होने वाले लोगों को सुगमता से उपचार के लिए एम्स ऋषिकेश पहुंचाया जा सकेगा। जिससे आईडीपीएल,जौलीग्रांट आदि स्थानों पर एयर लिफ्ट कर लाए जाने वाले मरीजों को एम्स तक पहुंचाने में लाइफ सेविंग की दृष्टि से होने वाली देरी अब नहीं होगी।          
गौरतलब है कि राज्य के विभिन्न हिस्सों में होने वाली आपदाएं अथवा सड़क दुर्घटनाओं में गंभीररूप से घायलों को राज्य सरकार की ओर से एयर लिफ्ट करके एम्स में उपचार के लिए भर्ती कराया जाता है। इससे पूर्व घायलों को आईडीपीएल हेलीपैड, जौलीग्रांट आदि स्थानों पर हेलीकाप्टर को लेंड कर घायलों को सड़क मार्ग से एम्स ऋषिकेश पहुंचाया जाता था।जिससे मरीजों को एम्स तक पहुंचाने व उपचार में विलंब होता था, जिससे मरीजों खासकर ट्रॉमा पेशेंट की रिकवरी में जोखिम बना रहता था। 
राज्य में विभिन्न दुर्घटनाओं में घायलों को तत्काल एम्स में उपचार के लिए पहुंचाने के मद्देनजर एम्स प्रशासन ने कैंपस में  हेलीपैड बनाया था । सिविल एविएशन की गाइडलाइन्स के अनुसार, एम्स प्रशासन द्वारा राष्ट्रीय विमान पत्तन प्राधिकरण के मानकों  पर आधारित हेलीपैड तैयार कर दिया गया था,जिसे बीते दिवस नागर विमान मंत्रालय के तहत कार्यरत डीजीसीए द्वारा अनापत्ति प्रमाणपत्र दे दिया था।  डीजीसीए की एनओसी के बाद मंगलवार को एम्स के हेलीपैड पर पहली ट्रॉयल लेंडिंग सफलतापूर्वक कर ली गई।
इस ट्रायल लैंडिंग में एम्स निदेशक प्रो. रवि कांत जी जॉलीग्रांट से एम्स  हेलीकॉप्टर द्वारा पहुँचे। इनके साथ उत्तराखंड सरकार के नागरिक उड्डयन सलाहकार कैप्टेन दीप श्रीवास्तव भी थे। उन्होंने बताया कि यह मुख्यमंत्री श्री त्रिवेंद्र सिंह रावत जी का ड्रीम प्रोजेक्ट था जिसकी ट्रायल लैंडिंग  सफल रही ।  एम्स ऋषिकेश में एयर एम्बुलेंस सेवा का मुख्यमंत्री श्री त्रिवेंद्र सिंह रावत निकट भविष्य में विधिवत उद्घाटन करेंगे। 
इस अवसर पर एम्स निदेशक पद्मश्री प्रोफेसर रवि कांत जी ने बताया कि गंभीर मरीजों को तत्काल उपचार दिलाने के लिए राज्य सरकार के साथ साथ एम्स प्रशासन भी गंभीर है,जिसके मद्देनजर एम्स की ओर से परिसर में हेलीपैड का निर्माण करा दिया गया है। उन्होंने बताया ​कि उक्त कार्य में राज्य सरकार व सूबे के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत जी की ओर से एम्स को हरसंभव सहयोग किया गया। 
एम्स ऋषिकेश के एविएशन एवं एयर रेस्क्यू सर्विसेज के इंचार्ज डॉ. मधुर उनियाल जी ने बताया कि एम्स राज्य के किसी भी हिस्से में होने वाली आपदा व सड़क दुर्घटना के घायलों को तत्काल उपचार दिलाने के लिए राज्य सरकार के साथ पूरी तरह से संकल्पबद्ध होकर सहयोग कर रहा है,जिसके मद्देनजर मरीजों की लाइफ सेविंग के लिए कैंपस में ही हेलिपैड बना लिया गया है,जिससे भविष्य में घायलों को परिसर में एयरलिफ्ट कर पहुंचाया जा सकेगा और जल्द से जल्द उनका इलाज शुरू कर दिया जाएगा। इस अवसर पर ​डीन एकेडमिक प्रो. मनोज गुप्ता, डीन अस्पताल प्रशासन प्रो. यूबी मिश्रा, उपनिदेशक प्रशासन अंशुमान गुप्ता, प्रो. ब्रिजेंद्र सिंह, प्रो. कमर आजम,  अधीक्षक अभियंता अनुराग सिंह, डा. बलराम जीओमर, जनसंपर्क अधिकारी हरीश मोहन थपलियाल, रजिस्ट्रार राजीव चौधरी तथा अन्य संकाय सदस्य आदि मौजूद थे।

बांस की लकड़ी को क्यों नहीं जलाया जाता है? इसके पीछे धार्मिक कारण है या वैज्ञानिक कारण ?

बांस की लकड़ी को क्यों नहीं जलाया जाता है?

इसके पीछे धार्मिक कारण है या वैज्ञानिक कारण ?

हम अक्सर शुभ (जैसे हवन अथवा पूजन) और अशुभ (दाह संस्कार) कामों के लिए विभिन्न प्रकार के लकड़ियों को जलाने में प्रयोग करते है लेकिन क्या आपने कभी किसी काम के दौरान बांस की लकड़ी को जलता हुआ देखा है। नहीं ना?

भारतीय संस्कृति, परंपरा और धार्मिक महत्व के अनुसार, 'हमारे शास्त्रों में बांस की लकड़ी को जलाना वर्जित माना गया है। यहां तक की हम अर्थी के लिए बांस की लकड़ी का उपयोग तो करते है लेकिन उसे चिता में जलाते नहीं।' हिन्दू धर्मानुसार बांस जलाने से पितृ दोष लगता है वहीं जन्म के समय जो नाल माता और शिशु को जोड़ के रखती है, उसे भी बांस के वृक्षो के बीच मे गाड़ते है ताकि वंश सदैव बढ़ता रहे।

क्या इसका कोई वैज्ञानिक कारण है?
बांस में लेड व हेवी मेटल प्रचुर मात्रा में पाई जाती है। लेड जलने पर लेड ऑक्साइड बनाता है जो कि एक खतरनाक नीरो टॉक्सिक है हेवी मेटल भी जलने पर ऑक्साइड्स बनाते हैं।
 
लेकिन जिस बांस की लकड़ी को जलाना शास्त्रों में वर्जित है यहां तक कि चिता मे भी नही जला सकते, उस बांस की लकड़ी को हमलोग रोज़ अगरबत्ती में जलाते हैं।

 अगरबत्ती के जलने से उतपन्न हुई सुगन्ध के प्रसार के लिए फेथलेट नाम के विशिष्ट केमिकल का प्रयोग किया जाता है। यह एक फेथलिक एसिड का ईस्टर होता है जो कि श्वांस के साथ शरीर में प्रवेश करता है, इस प्रकार अगरबत्ती की तथाकथित सुगन्ध न्यूरोटॉक्सिक एवम हेप्टोटोक्सिक को भी स्वांस के साथ शरीर मे पहुंचाती है।

इसकी लेश मात्र उपस्थिति केन्सर अथवा मष्तिष्क आघात का कारण बन सकती है। हेप्टो टॉक्सिक की थोड़ी सी मात्रा लीवर को नष्ट करने के लिए पर्याप्त है।

शास्त्रो में पूजन विधान में कही भी अगरबत्ती का उल्लेख नही मिलता सब जगह धूप ही लिखा है, हर स्थान पर धूप,दीप,नैवेद्य का ही वर्णन है।

अगरबत्ती का प्रयोग भारतवर्ष में इस्लाम के आगमन के साथ ही शुरू हुआ है।  
मुस्लिम लोग अगरबत्ती मज़ारों में जलाते है, हम हमेशा अंधानुकरण ही करते है, जब कि हमारे धर्म की हर एक बातें वैज्ञानिक दृष्टिकोण के अनुसार मानवमात्र के कल्याण के लिए ही बनी है।

अतः कृपया अगरबत्ती की जगह धूप  का ही उपयोग करें।

Friday

मुंसी प्रेमचंद जी की एक सुंदर कविता, जिसके एक-एक शब्द को बार-बार पढ़ने को मन करता है

मुंसी प्रेमचंद जी की एक सुंदर कविता, जिसके एक-एक शब्द को बार-बार पढ़ने को मन करता है

_ख्वाहिश नहीं मुझे_
_मशहूर होने की,"_

        _आप मुझे पहचानते हो_
        _बस इतना ही काफी है।_


_अच्छे ने अच्छा और_
_बुरे ने बुरा जाना मुझे,_

        _जिसकी जितनी जरूरत थी_
        _उसने उतना ही पहचाना मुझे!_


_जिन्दगी का फलसफा भी_
_कितना अजीब है,_

        _शामें कटती नहीं और_
        _साल गुजरते चले जा रहे हैं!_


_एक अजीब सी_
_'दौड़' है ये जिन्दगी,_

        _जीत जाओ तो कई_
        _अपने पीछे छूट जाते हैं और_

_हार जाओ तो_
_अपने ही पीछे छोड़ जाते हैं!_


_बैठ जाता हूँ_
_मिट्टी पे अक्सर,_

        _मुझे अपनी_
        _औकात अच्छी लगती है।_

_मैंने समंदर से_
_सीखा है जीने का सलीका,_

        _चुपचाप से बहना और_
        _अपनी मौज में रहना।_


_ऐसा नहीं कि मुझमें_
_कोई ऐब नहीं है,_

        _पर सच कहता हूँ_
        _मुझमें कोई फरेब नहीं है।_


_जल जाते हैं मेरे अंदाज से_
_मेरे दुश्मन,_

              _एक मुद्दत से मैंने_
       _न तो मोहब्बत बदली_ 
      _और न ही दोस्त बदले हैं।_


_एक घड़ी खरीदकर_
_हाथ में क्या बाँध ली,_

        _वक्त पीछे ही_
        _पड़ गया मेरे!_

_सोचा था घर बनाकर_
_बैठूँगा सुकून से,_

        _पर घर की जरूरतों ने_
        _मुसाफिर बना डाला मुझे!_


_सुकून की बात मत कर_
_ऐ गालिब,_

        _बचपन वाला इतवार_
        _अब नहीं आता!_

_जीवन की भागदौड़ में_
_क्यूँ वक्त के साथ रंगत खो जाती है ?_

        _हँसती-खेलती जिन्दगी भी_
        _आम हो जाती है!_


_एक सबेरा था_
_जब हँसकर उठते थे हम,_

        _और आज कई बार बिना मुस्कुराए_
        _ही शाम हो जाती है!_


_कितने दूर निकल गए_
_रिश्तों को निभाते-निभाते,_

        _खुद को खो दिया हमने_
        _अपनों को पाते-पाते।_


_लोग कहते हैं_
_हम मुस्कुराते बहुत हैं,_

        _और हम थक गए_
        _दर्द छुपाते-छुपाते!_


_खुश हूँ और सबको_
_खुश रखता हूँ,_

        _लापरवाह हूँ ख़ुद के लिए_
        _मगर सबकी परवाह करता हूँ।_

_मालूम है_
_कोई मोल नहीं है मेरा फिर भी_

        _कुछ अनमोल लोगों से_
        _रिश्ते रखता हूँ।_

मैनें तीस दिन काम किया और Tax दिया, कैसे? और मुझे क्या मिला? - पढ़िए और दूसरों को शेयर करें

मैनें तीस दिन काम किया
_
तनख्वाह ली - टैक्स दिया
मोबाइल खरीदा - टैक्स दिया--'
रिचार्ज किया - टैक्स दिया
डेटा लिया - टैक्स दिया
बिजली ली - टैक्स दिया
घर लिया - टैक्स दिया
TV फ्रीज़ आदि लिये - टैक्स दिया
कार ली - टैक्स दिया
पेट्रोल लिया - टैक्स दिया
सर्विस करवाई - टैक्स दिया
रोड पर चला - टैक्स दिया
टोल पर फिर - टैक्स दिया
लाइसेंस बनाया - टैक्स दिया
गलती की तो - टैक्स दिया
रेस्तरां मे खाया - टैक्स दिया
पार्किंग का - टैक्स दिया
पानी लिया - टैक्स दिया
राशन खरीदा - टैक्स दिया
कपड़े खरीदे - टैक्स दिया
जूते खरीदे - टैक्स दिया
कितबें ली - टैक्स दिया
टॉयलेट गया - टैक्स दिया
दवाई ली तो - टैक्स दिया
गैस ली - टैक्स दिया
सैकड़ों और चीजें ली ओर - टैक्स दिया, कहीं फ़ीस दी, कहीं बिल, कहीं ब्याज दिया, कहीं जुर्माने के नाम पर तो कहीं रिश्वत के नाम पर पैसा देने पड़े, ये सब ड्रामे के बाद गलती से सेविंग मे बचा तो फिर टैक्स दिया----
सारी उम्र काम करने के बाद कोई सोशल सेक्युरिटी नहीं, कोई पेंशन नही, कोई मेडिकल सुविधा नहीं, बच्चों के लिये अच्छे स्कूल नहीं, पब्लिक ट्रांस्पोर्ट नहीं, सड़कें खराब, स्ट्रीट लाईट खराब, हवा खराब, पानी खराब, फल सब्जी जहरीली, हॉस्पिटल महंगे, हर साल महंगाई की मार, आकस्मिक खर्चे व् आपदाएं , उसके बाद हर जगह लाइनें।।।।
सारा पैसा गया कहाँ????
करप्शन में , 
इलेक्शन में ,
अमीरों की सब्सिड़ी में ,
माल्या जैसो के भागने में
अमीरों के फर्जी दिवालिया होने में ,
स्विस बैंकों में ,
नेताओं के बंगले और कारों मे,    
और हमें झण्डू बाम बनाने मे।
अब किस को बोलूं कौन चोर है???
आखिर कब तक हमारे देशवासी यूंही घिसटती जिन्दगी जीते रहेंगे?????
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कृपया इसे हरेक नागरिक को भेजें.
इतना लगान तो अंग्रेज भी नहीं लेते थे।

कोरोना काल में ससुराल यात्रा - एक सुन्दर कविता

कोरोना काल में जब पहुंच गया ससुराल !
बहुत ही अजीब सा था वहां का हाल !!
घर की घंटी बजाते ही सास दौड़ी आई !
देख जमाई को आज, मजबूरी मे मुसकाई !!
बोली थोड़ी देर गेट पर आप ठहर जाओ !
वाश वेशन पर सैनिटाइजर से हाथ धो आओ !!
पढे लिखे हो चेहरे पर मास्क नहीं लगाया ?
घर पर ही रहना था किसी ने नहीं समझाया ??
खैर आ ही गए हो तो दरवाजे पर जूते दो उतार !
पैर धोकर आ जाओ चाय रखी है तैयार !!
मन मे उठा क्रोध पर कुछ कह नहीं पाया !
लगा जैसे जमाई नही, कोई राक्षस ससुराल आया !!
इज्जत तो सारी आज कोरोना ने हर ली !
बाकी की कसर सासू माँ ने पूरी कर ली !!
फिर बेआबरू हो कदम साली की ओर बढाया !
वहां से भी नकारात्मक सा उत्तर आया !!
वो बोली सामाजिक दूरी को समझ नहीं पाये ?
हमारे इतनी पास क्यूँ जीजाजी चले आऐ ??
दूर से ही करती हूँ आज आपको नमस्ते !
छोटे साले ने भी दूर से हाथ हिलाया, हंसते हंसते !! 
फिर ससुर जी की मधुर आवाज दी सुनाई !
कवारंटाइन करना रे, बाहर से आया है जमाई  !!
चाय हाथ में थी, पर नहीं जा रही थी गटकी !
चाय खत्म होते ही, लगाना चाह रहा था घुडकी !!
जो काम सरकार लोकडाउन मे नहीं कर पाई !
ससुराल वालों ने एक ही दिन में थी समझाई!
विनती करता हूं तुमसे इन हालात में ससुराल मत चले जाना मेरे भाई!🤔🤔🤔🤣🤣🤣 जन हीत में जारी ऐसी स्थिति में नहीं करे कही भी आना जाना

💐सुरक सुरक💐 - शिसक सिशक

भागीरथी के बहाव को तु सुन रहा  सुरक सुरक💐
जानबूझकर मौन होकर तु देख रहा सुरक सुरक 💐

जन्म भुमि भी पहाड बनकर
रो रही थी सिशक शिसक💐
फिर भी तुझै दया न आई
देख रहा सुरक सुरक💐

माधोसिंह तीलु कुफु कि भुमि तूम देख रहे थे सुरक सुरक💐
फिर भी तुझे दया न आई
मोन बनकर देख रहा सुरक सुरक💐

विधाता कि नगरी कैसी विपदा मे आई💐
पहाड़ पुत्रो सच मे उन दुष्टो को शर्म नही आई💐

श्री देव सुमन तेरा हिमालय देख रहा सुरक सुरक💐
वह हिमालय भी विरह ब्यथा मै रो रहा सुरक सुरक💐

सावन के उगे फल फुलो से लदे पेड देख रहे थे सुरक सुरक💐
भुख तीस तेरी मिटाने मे हम भी विरह मे रो रहे थे शिशक शिशक💐

अन्न भुसा पिसा का़ंच मोन होकर दे रहे थे सुरक सुरक💐
वेशर्मी कि हदे पार कर वै
कर रहे थे खुसर फुसर💐

 युगो युगो से आज तक देव सुमन जन जन रो रहा शिशक शिशक
युगो युगो तक   देव सुमन सब जन मन बोल रहा नमन नमन 

25 जुलाई की वह सावन तिथी वीत रही थी  सुरक सुरक 💐
सावन कि  वह चांदनी रात्रि भी रो रहि थी शिशक शिशक💐
76 वे बलिदान दिवस पर श्रीदेव सुमन जी को शत शत नमन
आपणी या स्वरचित कविता कनी लगी अवश्य बतान👏👏
💐धुल की श्रद्धांजलि💐